Monday, June 1, 2026
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नसीबनामा – एक मुकम्मल मोहब्बत की कहानी

ये कहानी है एक ऐसे रिश्ते की जिसका साथ सच में भगवान ने लिखा है। कहा जाता है न — नसीब में जो होगा, वो मिलेगा। शायद आलिया और राहुल दोनों एक-दूसरे के नसीब में पहले से लिखे जा चुके थे। इनकी दोस्ती हुई, टूटी… मोहब्बत का सिलसिला बढ़ा भी ना था और खत्म हो गया… दोनों अलग धर्म से भी थे, बावजूद इसके ये दोनों एक-दूसरे के लिए लिखे जा चुके थे।

तो आइए शुरू करते हैं…

आलिया — जो कि उसका पहले से बॉयफ्रेंड था, साथ ही वो मुस्लिम धर्म की थी। उसकी बड़ी दीदी, माता-पिता समेत एक बड़ा भाई भी था।

राहुल — घर का मंझला बेटा, जिसका धर्म हिन्दू था।

अंकित — जो कि आलिया का बॉयफ्रेंड था स्कूल में।

तो चलिए शुरू करते हैं। बात तब की है जब तीनों 12th में थे। राहुल पहले से उसी स्कूल में था पर आलिया अपने बॉयफ्रेंड अंकित के साथ पहली बार उस स्कूल में आई। राहुल इस बात से अनजान था कि कभी उसे उसी लड़की से एक तरफ़ा मोहब्बत हो जाएगी…

जब आलिया को पहली बार देखा

आज स्कूल में एनुअल फंक्शन था। आलिया को जब आज राहुल ने पहली बार देखा तो दंग रह गया। शर्माती हुई आँखों से राहुल ने पहली बार आलिया को गौर से देखा ।

आलिया आज काली साड़ी पहनी थी । एक हाथ में चूड़ी और दूसरे हाथ में घड़ी पहने हुए अपने बालों को खुला छोड़ रखी थी। राहुल खुद को उसके ज़ुल्फ़ों में उलझने से नहीं रोक पाया। राहुल खुद को उसकी ओर देखने से नहीं रोक पाया। वो आलिया की हामी भरे बिना उससे मोहब्बत करने से ना रोक सका, पर वो इस बात से भी वाकिफ़ था कि आलिया की ज़िंदगी में अंकित है। बस इसी वजह से राहुल ने खुद के क़दमों को रोक लिया।

पर अपने दिल को आलिया के लिए धड़कने से रोक नहीं पाया।

अब मोहब्बत का एकतरफ़ा सिलसिला चालू हो चुका था — आलिया को बिना बताए।

अब स्कूल के दिन बीत गए। 12th पूरा हो चुका था। अंकित, आलिया और राहुल — तीनों के रास्ते अलग हो चुके थे।

एक साल बाद

आज एक साल बाद जब राहुल ने कॉलेज में प्रवेश लिया, तो वो पहली बार क्लासरूम में पहुंचा, तो वो दंग रह गया क्योंकि उसी क्लास के पहली बेंच पर उसने आलिया को बैठा पाया।
मैंने कहा था ना — मोहब्बत नसीब से मिलती है। शायद आलिया और राहुल किस्मत में पहले से लिखे जा चुके थे एक-दूसरे के लिए। पर इनके सामने चुनौती कम नहीं थी क्योंकि दोनों अलग-अलग धर्म से थे।

राहुल शर्मीला लड़का था। आलिया से बेइंतहा प्यार होने के बाद भी उससे कुछ कह ना सका।

एक दिन की बात है: आलिया खुद से चलकर राहुल के पास आई, उससे बातें कीं। पर राहुल ने उतना ही बात किया जितना आलिया ने उससे पूछा था।
अब धीरे-धीरे उनकी बातें दोस्ती में बदलीं। अब दोनों एक-दूसरे से खुलकर बात करने लगे। दोनों के बीच में दोस्ती गहरी हो चुकी थी। राहुल आलिया की परवाह करता, फ़िक्र करता। आलिया को इस बात से कोई दिक्कत नहीं थी क्योंकि आलिया की नज़र में राहुल की मोहब्बत दोस्ती ही थी।

दोनों की दोस्ती को अब एक साल हो चुका था। दोस्ती काफ़ी गहरी हो चुकी थी।
आज राहुल ने आलिया से उसके बॉयफ्रेंड अंकित के बारे में पूछा — “वो कहाँ है?”

आलिया ने कहा — “मुझे नहीं पता।”

राहुल ने कहा — “हुआ क्या था जो तुम दोनों अलग हो गए?”

आलिया ने कहा — “हम दोनों अलग धर्म से थे। अंकित के परिवार वाले मेरे लिए तैयार नहीं थे, इसलिए उसने मेरा हाथ छोड़ दिया। उसी वजह से मैंने एक साल गैप करके कॉलेज जॉइन किया।”

राहुल ने ये बात यहीं ख़त्म कर दी। कुछ और न पूछा।

अब राहुल को लगा कि उसे अपने दिल की बात बतानी चाहिए। पर उसमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि वो आलिया को अपने जज़्बात के बारे में बता सके।

राहुल ने सारी बातें आलिया की दोस्त साक्षी को बताईं। साक्षी ने सारी बात जाकर आलिया को बता दी।
आलिया ने साफ़-साफ़ राहुल से कह दिया — “मुझे प्यार-मोहब्बत में नहीं पड़ना। मुझे प्यार में भरोसा नहीं है। मैं इन सब से दूर ही रहना चाहती हूं।”

इस पर राहुल ने कहा — “मेरे जज़्बात मैंने तुमको बता दिया। तुमने भी अपना फ़ैसला कर लिया। चलो जो हुआ उसे भूल जाते हैं। अब हम दोबारा कभी इस बारे में बात नहीं करेंगे। तुम ये सब भूल जाओ।” — ये कहकर राहुल चला गया।

पर आलिया इस बात को नहीं भूल पाई। अब जब राहुल पहले की तरह आलिया की फ़िक्र करता तो उसे पसंद नहीं आता। उसे उसकी दोस्ती में भी उसको प्यार ही दिखता। वो साफ़-साफ़ राहुल को मना कर देती कि “मेरी परवाह मत किया करो।”

अब आलिया राहुल से दूरी बनाने लगी थी। दोनों की दोस्ती पूरी तरह से ख़राब हो चुकी थी। दोनों अलग-अलग हो गए। अब वो ठीक से बात भी नहीं करते थे।
दोनों ने अपने कदम दोस्ती से पीछे कर लिए थे।

एक दिन राहुल को पता चला कि आलिया किसी के साथ रिलेशनशिप में है।
राहुल को ये बात तमाचे जैसी लगी। उसे लगा कि आलिया ने राहुल को कभी पसंद ही नहीं किया था। ये बात कहीं न कहीं सही भी थी।

राहुल ने जब आलिया को अपने दिल की बात बताई, तब आलिया ने बहाना किया। राहुल सोचता कि सीधे-सीधे आलिया उसे मना कर देती — झूठ बोलने की ज़रूरत ही क्या थी? अब राहुल ने खुद को समझा लिया था कि आलिया उसकी कभी नहीं हो सकती।
अब राहुल भी दूर-दूर रहने लगा आलिया से।

एक दिन कॉलेज में पार्टी थी।

राहुल थोड़ा शर्मीला मिजाज का लड़का था, तो वो इन सब से थोड़ा दूर रहता था। वो पार्टी में गया नहीं था।

पर पार्टी में आलिया थी — अपने करंट बॉयफ्रेंड प्रतीक के साथ। जब पार्टी ज़ोर-शोर पर थी, तब आलिया के बॉयफ्रेंड ने आलिया को कोने में ले जाकर बदतमीज़ी की। प्रतीक आलिया के कुछ दोस्तों को पसंद नही करता था । वह हमेशा यही चाहता था की आलिया हर चीज उसी के हिसाब से करे ।

आलिया का लड़कों से बातें करना, उनसे दोस्ती करना प्रतीक को बिल्कुल भी पसंद नही था । इस बात को लेकर उनके बीच काफ़ी बहस भी हुई। सबको पता भी चल गया कि वहां चल क्या रहा था।

अगले दिन सुबह, आलिया खुद से राहुल के पास गई और कहा —
“राहुल, मैंने तुमसे कुछ छुपाया है। मैं किसी लड़के के साथ रिलेशनशिप में हूं।”

राहुल का जवाब आया — “तुम बोलो या ना बोलो, मुझे पहले से पता था। पर मुझे तुम्हारी ज़िंदगी से कोई मतलब नहीं।”

आलिया बोली — “कल रात मेरे उसी बॉयफ्रेंड ने मेरे साथ बदतमीज़ी की…”

इतना सुनते ही राहुल ग़ुस्से से लाल हो गया। जो लड़का थोड़ी देर पहले आलिया की ज़िंदगी से मतलब नहीं रखना चाह रहा था, वहीं लड़का पूरी बात सुने बिना उस लड़के को पीटने लगा।
सबने रोका। काफ़ी हाथापाई के बाद राहुल ने उस लड़के को छोड़ा।

आलिया पूरी तरह से राहुल की हो चुकी थी। उसे राहुल में अपना सच्चा हमसफ़र मिल चुका था। आलिया बहुत खुश थी, पर करती भी क्या? राहुल को अब कैसे बताती कि मैं तुमसे प्यार करती हूं?

अब आलिया फिर से राहुल के पास आने लगी थी। वो राहुल से बार-बार पूछती — “क्या तुम अब भी मुझे प्यार करते हो?”
पर अब राहुल, प्यार होते हुए भी साफ़ मना कर देता — “हम सिर्फ़ दोस्त ही हैं।”

जब आलिया ने किया प्यार का इजहार

एक दिन की बात है: रूही नाम की लड़की ने गलती से या दोस्ती के नाते ही सही, राहुल को गले लगा लिया।
आलिया ने तुरंत उसे झटक कर राहुल से अलग कर दिया, उसे सुनाने लगी।

तब राहुल ने कहा — “तुम होती कौन हो मुझ पर हक़ जताने वाली? दोस्त हो, तो दोस्त की तरह रहो।”

आलिया चाह कर भी अपने प्यार के बारे में नहीं बता पाई, क्योंकि उसे लगता था कि राहुल को मना करके उसने सबसे बड़ी भूल की है। वो राहुल की नज़र से गिर चुकी है। इसी वजह से आलिया वहां से रोती-रोती चली गई।

आलिया को रोता हुआ देख कर राहुल को अपनी गलती का अहसास हुआ । उसे लगा कि उसने आलिया और अपनी मोहब्बत के साथ ज़्यादती की है।

वो सीधा आलिया के घर पहुंचा। आलिया की अम्मी ने बताया — “आलिया रूम में है।”

राहुल आलिया के रूम में पहुंचा, तब उसने पूछा — “आलिया, तुमने ऐसा क्यों किया?”

तब आलिया राहुल को गले लगाकर कहती है — “मैं तुमसे प्यार करती हूं।”

ये शब्द राहुल सुनते ही खुश हो गया। जिस मोहब्बत को पाने की चाह कई सालों से थी, जिसकी उसने पाने की उम्मीद खो दी थी — आज वही मोहब्बत, वही प्यार उसकी बाहों में थी।
दोनों एक-दूसरे में खो चुके थे। थोड़ी देर के लिए मदहोश हो चुके थे।

पर यहाँ सब कुछ सही नहीं हुआ।
आपको लगा होगा कि उनकी मोहब्बत पूरी हो गई — नहीं। उनकी मोहब्बत चालू होने से पहले ही खत्म हो चुकी थी।

मैंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि आलिया और राहुल को लिपटे हुए उसकी बड़ी दीदी ने देख लिया और पूरे घरवालों को चिल्ला कर इकट्ठा कर लिया।
उसके बाद राहुल को धक्के मार कर बाहर निकाल दिया गया। आलिया से उसका फ़ोन छीन लिया गया। उसका कॉलेज बंद करवा दिया गया। आलिया को उसके कमरे में नज़रबंद कर दिया गया।

इधर राहुल का हाल बेहाल हो चुका था। उसके सपने बिखर गए थे।

जिन्हें समेटना नामुमकिन सा था।
पर कहते हैं ना — प्यार खुद-ब-खुद पूरा नहीं होता, उसे पूरा करना पड़ता है।
प्यार में सच्चाई हो, तो ज़माना झुकने की हिम्मत रखता है…

हुआ भी कुछ ऐसा।

एक दिन आलिया का अचानक फ़ोन आया। उसने राहुल को मिलने बुलाया।
दोनों घर में बिना बताए एक-दूसरे से मिलने पहुंचे, जहाँ दोनों ने तय किया कि वो एक-दूसरे के साथ ही जिएंगे — मरेंगे नहीं।

उन्होंने तय किया कि दोनों अपने-अपने घरवालों को फ़ोन करेंगे, उन्हें अपने रिश्ते के बारे में बताएंगे।
अगर उन्होंने मना किया, तो दोनों यहीं से साथ में भाग जाएंगे।

और दोनों ने किया भी वही।
दोनों के घरवालों ने दोनों की बातें सुनीं, दोनों की धमकी सुनी।
राहुल के घरवाले राज़ी-खुशी मान गए।
पर आलिया के पापा ने राहुल के सामने शर्त रखी कि — “शादी के बाद मेरी बेटी धर्म नहीं बदलेगी।”
राहुल ने बिना देर किए हामी भरी। राहुल के घरवालों को भी कोई दिक्कत नहीं थी — बच्चों की खुशी ज़रूरी थी।

नसीबनामा के बाद इन्हें भी पढ़ें –

1- इश्क की जंग

2- इश्क़ या इम्तिहान – दूसरी बार टूटा एक दिल

3- खुद्दारी, मोहब्बत और मौत

इस तरह दोनों की शादी हुई — घरवालों की सहमति के साथ।
दोनों ने इश्क़ की बाज़ी जीत ली थी।

पर राहुल और आलिया की मोहब्बत पर समाज की नज़र पड़ गई।
समाज ने साफ़-साफ़ कहा — “आलिया का धर्म परिवर्तन करवाओ, नहीं तो ये जगह छोड़ दो…”

राहुल को फ़ैसला करने में देरी नहीं लगी। उसने आलिया का हाथ थामा था, और वो भी उसके पिता की मर्ज़ी से। वो अपने ससुर की उम्मीदों पर खरा उतरना चाहता था।
उसने आलिया के साथ उस जगह को छोड़ने का फ़ैसला ले लिया। दोनों उस शहर से दूर आकर अपनी खुद की दुनिया बसा लिए।

सच में, आलिया के पापा ने राहुल के हाथ में अपनी बेटी का हाथ देकर कोई गलती नहीं की थी।

अब इसे खुदा की रहमत समझो या भगवान की मेहरबानी —
दोनों की मोहब्बत पूरी हो ही गई।
सच में, दोनों एक-दूसरे की किस्मत में शुरू से लिखे थे।

मैं मेरे भगवान और खुदा से यही दुआ करूंगी —
“अपनी रहमत उन पर हमेशा बनाए रखे…
जिन्होंने मोहब्बत की जंग जीत ली।”

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HII.. I AM AANYA. जहां देखो, वहां एक कहानी छुपी है – चाहे वो रोज़मर्रा की छोटी-छोटी बातें हों या फिर कल्पना के उड़ते पंख। मैं शब्दों के जाल बुनती हूं, हर भावना को कागज पर उतारती हूं, और हर अनकही कहानी को आवाज़ देती हूं।
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