ये कहानी है एक ऐसी लड़की की जिसने अपने प्यार को पाने के लिए अपने परिवार से और खुद से भी एक जंग लड़ी । “इश्क की जंग” आपको एक लड़की के प्रति सामाजिक दबाओ और उसे मिले धोखे के ऊपर आधारित है । रानी और अनु दो ऐसे लड़कियां थी , जिनके रास्ते तो अलग-अलग है पर मंजिल एक । कहते हैं ना, दो सामान जरूरत वाले इंसान अक्सर हमसफर बन जाया करते हैं । ठीक ऐसा ही यहां पर है…
रानी और अनु दोनों सहेलियां थीं । ऐसी वैसी नहीं बल्कि दोनों दोस्ती में एक दूसरे की ख़ुशी के लिए पूरी दुनिया से लड़ जाते थे । जितना वो एक दूसरे से प्यार करते, उससे ज़्यादा झगड़ा भी करते थे । दोनों को एक दूसरे से बहुत सारी उम्मीदें जो थीं । रानी अगर किसी दूसरी लड़की से बात करतीं तो अनु चिढ़ जाती, वही अगर अनु किसी और से बात कर लेती तो रानी मुंह बिगड़ लेती… दोनों एक दूसरे के लिए काफ़ी थे पर इसका मतलब ये नहीँ की दोनों लेस्बियन हो….
दोनों की ही अपनी-अपनी प्रेम कहानी है, जिसमें एक की पूरी होतीं है, दूसरे की नहीं । आइये दोनों की प्रेम कहानी देखे..
रानी की मोहब्बत
मोहब्बत इसीलिए क्योंकि ये अधूरी नहीं रहती!!
रानी बहुत ही भावुक प्रकृति की थी । उसके घर में माँ बाप भाई दादी दादा चाचा चाची सब थे, परिवार सम्पन्न था । अगर कोई कमी थी, तो बस रानी में । जो की एक आंतरिक कमी थी , जिसके बारे में उसे खुद को पता नहीं था ।
रानी बचपन का पड़ाव पार कर जवानी में कदम रख रही थी । लड़कियों में शारीरिक से लेकर आंतरिक कई बदलाव आते हैं । जिसे वो घर में बताने से हिचकिचाते हैं । कुछ ऐसा ही रानी के साथ हुआ था । रानी की उम्र की लगभग सारी लड़कियों को पीरियड आ चूका था, पर रानी को अब तक नहीं ।
वो कई सारे घरेलू नुस्खे आजमा कर थक चुकी थी । एक उम्र बीतने के बाद ना बताने पर भी माँ को बेटी के बारे में पता चल ही जाता है । जब रानी की माँ को इस बात की जानकारी हुई तो वह रानी को लेकर डॉक्टर के पास गयी । माँ ने डॉ की बताई सारी बाते रानी से गोपनीय रखी । इसका पता रानी को ना चलने दिया । जब रानी ने माँ को पूछा तब उन्होंने कहा – सब नॉर्मल है । बस थोड़ी दवाई खानी होंगी । तब रानी ने भी माँ की बात सरलता से मान कर दवाई खाने लगी ।
गुजरते वक्त के साथ रानी स्कूल से कॉलेज तक पहुंच गयी लेकिन उसका महीना (पीरियड )अब तक नहीं आया !! वो खुद में एक कमी को महसूस करती । उसने ये बात अपनी सहेलियों से भी छिपा के रखी थी ।
इसलिए नहीं की उसे झूठ बोलना पसंद था या अच्छा लगता था । बल्कि इसलिए की कोई उसे सहानुभूति से ना देखे । वो अपनी कमी अपने तक ही रखना चाह रही थी । पर इसका मतलब ये नहीं की वो भूल गयी हो । बल्कि बढ़ते उम्र के साथ ये कमी उसे चुभने सी लगी थी । वो सोचती कौन उसका हाथ थामेगा ? उसे जिंदगी इस कमी के साथ गुजारनी होगी ! ये सब सोचते हुए वो अपने परिवार से नज़रें ना मिला पाती । उसके घर में ये बात सबको पता लग चुकी थी । लेकिन कहने हैं न जिंदगी ने सबके लिए कुछ न कुछ जरूर तय किया होता है ।
रानी और कबीर की मुलाकात
रानी की मुलाकात कबीर नाम एक लड़के से हुई । वो अपनी कमियों को अच्छी तरह जानती थी । जिस कारण वो लड़कों से दोस्ती करने में भी बेहद हिचकिचाती थी । ऐसा नहीं है की पिरियड्स न आने के कारण रानी में लड़कों के प्रति आकर्षण नहीं था । अन्य सामान्य लड़कियों की तरह ही उसमें भी शारीरिक जरूरतें और भावनाएं थीं । बस डर था तो सिर्फ इस बात का की इस कमी कारण ही कोई लड़का उसे नहीं अपनाएगा ।
कबीर के साथ बातें करना रानी को भी बहुत अच्छा लगने लगा । बातें करते हुए दोनों का रिश्ता कब दोस्ती से आगे बढ़ के प्यार में बदल गया पता ही नहीं चला । जब कबीर ने जब रानी को प्रपोज किया, तब रानी खुशी से फूली ना समाई… मानो पल भर के लिए वो अपनी सारी तकलीफें, सारी परेशानियाँ भूल गई हो । उसे लगा की अब वो भी जिंदगी में आगे बढ़ सकती है । तभी उसे अपने अंदर की कमी को महसूस किया ओर ना चाहते हुए भी ये सोचने पर मजबूर हो गयी कि कबीर भी एक लड़का है । उसकी भी कुछ जरूरतें हैं, कुछ सपने हैं। क्या सब कुछ जानने के बाद भी वो मुझे इस कमी के साथ अपना पाएगा ।
ऐसे ही कई सवाल उसके मन में रह-रह कर उठने लगे । रानी एक बेहद साफ दिल की लड़की थी । वो किसी की भी जिंदगी खराब नहीं करना चाहती थी । रानी, जो कुछ समय पहले तक खुशी से फुली नहीं समा रही थी । अब दुख के समंदर में गोते लगा रही थी । अपने प्रेम की नौका को बीच मझदार में फंसा हुआ देख अपनी कमियों के लिए खुद को कोश रही थी ।
मानसिक रूप से परेशान रानी उस दिन इतना रोई की मानो खुद को गुनहगार मान लिया हो । क्या मैं किसी को ख़ुशी नहीं दे सकती ? इस खयाल ने उसके अंदर के आत्मविश्वास को खत्म कर दिया था । उसे ये लगने लगा की वो किसी के काबिल नहीं है वो अंदर ही अंदर घुटने लगी थी…। उसने निर्णय लिया की वो कबीर को मना कर देगी ।
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कबीर ने जब यह सुन तो उसे यकीन नहीं हो रहा था । क्या सच में तुम मुझसे प्यार नहीं करती रानी ? मैंने तुम्हारी आँखों में जो अपने लिया पर देखा क्या वो झूठ था ? मानो कबीर के पैरों तले जमीन ही खिसक गई हो !! उसके बार-बार पूछने पर पहले तो रानी ने जात अलग होना बताया ।
लेकिन मोहब्बत की गहराइयों में उतार चुकी रानी कब तक उससे सच छुपा पाती । कबीर की जिद और उसकी आँखों में अपने लिए बेतहाशा प्यार देख के रानी उससे कुछ ना छिपा सकी और सारी सारी बात बिना डर के कबीर को बात दिया । पूरी बात जानने के बाद कबीर ने एक गहरी सांस लेकर खुद को शांत किया और प्यार से उसका हाथ थाम कर जिंदगी भर साथ निभाने का वादा किया ।
रानी की सारी परेशानियां मानो खत्म हो गयी हो, अपने अंदर की सारी कमी को भूल के वो कबीर के साथ जीने लगी । कबीर ने उसे अपने पूरे घरवालों से मिला दिया । लेकिन घर वालों ने कास्ट अलग होने के कारण उसे अपनाने से मना कर दिया । इधर रानी छुप-छुप के कबीर से मिलती रही । आखिरकार दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया ।
रानी अगली सुबह कॉलेज के बहाने से निकली । कबीर उसे वहाँ से लेकर कोर्ट पहुंचा । जहाँ वकील से बात हो गयी लेकिन कबीर के आधार कार्ड अनुसार उसे 20 साल ही हो रहे थे । जिससे उनकी शादी ना हो पायी और शाम भी होने को या गई थी । इधर रानी के फोन पर घरवालों के कॉल आने शुरू हो गये रानी ने फोन ऑफ कर दिया ।
रात में रुकने के लिए जगह भी नहीं थी । तभी रानी को अपने एक रिश्तेदार की याद आयी । जिनका घर पास ही था दोनों ने रात वही गुजरने का फैसला किया । प्लान यह था, की सुबह होते ही दोनों वहाँ से निकल जायेंगे और आधार कार्ड सुधरवा कर कोर्ट मैरिज कर लेंगे ! यही सोच के वो रात बिताने रिश्तेदार के घर पर गये, दोनों ने रात बिताने के बाद सुबह वहाँ से निकलने ही वाले थे की रानी के घरवाले आ धमके… दरअसल हुआ ये था की रिश्तेदारों ने रात को ही रानी और कबीर की अपने यहां होने की जानकारी दे दी थी ।
रानी के घरवाले रानी को जबरदस्ती अपने साथ घर ले आये
उसके बाद रानी की जिंदगी आसन नहीं रही
उसे उस दिन पता चला उसका बच्चा दानी है ही नहीं उसे ऑपरेशन की जरूरत है… उसे पता नहीं क्या-क्या और ना जाने कितनी गालियाँ दी गयी । कितने ही थप्पड़ चेहरे पर और ना जाने कितनी ही बातें उसके मन पर लगीं ।
मानो वो दुनिया से पूछना चाह रहीं हो की केवल माँ ना बन पाने से वो अधूरी हो गयी ? एक कमी के करण किसी लडके के काबिल ना रही ? ये क्या अभिशाप है ? उसने सच में कोई पाप किया हो!! अगर पिछले जन्म पाप किया तो उसी जन्म में सजा क्यों नहीं ? इस जन्म सजा क्यों ? आज अगर भगवान भी सामने होते तो वो उनसे भी लड़ जाती… स्त्री की पहचान माँ बनने से ही क्यों ? अगर वो अधूरी है तो स्त्री जन्म क्यों?
उसके आँशु जवाब मांग रहे थे, बचपन से आज तक जितना उसने झेला अब उसमें हिम्मत ना रहीं…
मैं सबकी परेशानी की वजह हूँ और मेरी ख़ुशी मेरे घरवालों के लिए शर्मिंदगी की वजह , ये सोच कर उस मासूम लड़की ने अपनी जान लेने का प्रयास किया और एक ही सांस में जहर की शीशी पूरी पी गई !!
उसकी किस्मत अच्छी कहें या बुरी , लेकिन वो बच गयी । जब उसे होश आया खुद को उसने अस्पताल के बिस्तर पर पाया । घरवालों को भी अपनी गलती का अहसास हुआ उन्होंने उसको समझया की हमने जो भी किया उसके भले के लिए ही किया…
कुछ समय बीतने के बाद जब रानी ने दोबारा कबीर से कांटेक्ट किया, तब कबीर पूरी तरह से बदल चूका था । कबीर ने रानी से शादी करने से मना कर दिया । इस बदले हुए अंदाज के पीछे की कहानी ये थीं की कबीर के पापा के पूरे शरीर को लकवा मार गया था जिसके चलते सारी जिम्मेदारी कबीर के सर पर थी । जो कबीर, रानी को उसकी सारी कमियों के साथ अपनाने को तैयार था वो आज घर की जिम्मेदारियों के कारण रानी का हाथ नहीं थाम सकता था ।
जो रानी जगह खा के भी नहीं मरी थी उसने अपने अंदर आज सब कुछ सुना पाया। उसे यकीन हो गया हो की एक बोझ और उसमे कोई अंतर नहीं है ।
ये सब हालात से गुजर ही रहीं थी की उसकी जिंदगी में उसके ऐसे दोस्त ने कदम रखा, जिसने उसे सहारा दिया । इन सब से उभरने में कबीर को भुलाने में मदद की । जब रानी इन सब चीजों से पूरी तरह निकली । तब सब कुछ जानने के बाद भी उस लडके ने रानी को अपनाने का फैसला किया.. रानी उसके अहसानों तले दबी हुई थी । पर इतना भी नहीं की उसे मना ना कर सके…. पर उसने उस लड़के को मना नहीं किया उस लडके को उसने सीधा कहा प्यार मोहब्बत मेरी समझ में नहीं आते । तुम हमारे रिश्ते को नाम दे सको तो हाथ थामना मुझे मजबूरी नहीं पता, समाज नहीं पता, मगर तुम जवाब दे सको तो हाथ थामना…
तभी लडके ने रानी से सीधा शादी की बात की और अगले दिन सुबह दोनों ने जाती, समाज, कमी, पुरानी सोच, तानों, पाबन्दी की हर बेड़ी तोड़ के मंदिर में शादी कर ली…
उन्होंने साबित कर दिया जिसे साथ निभाना होता है उसके लिए कुछ मायने नहीं रखता । मजबूरी इंसान खुद ही खुद से बनता है!
ख़ुशी इस बात की है रानी ने अपने खुशियों की कद्र की । उन्हें घरवालों के इज्जत के हत्थे ना चढ़ने दिया । खोखली शान के चककर में एक सच्चा हमसफर कुर्बान नहीं किया!!
आज रानी सही मायने में खुद से लड़ के पूरी हो गयी!!
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