लता, एक ऐसी लड़की की कहानी, जिसने जीवन में बहुत कुछ खोया। कभी रोई, कभी हँसी, कभी उड़ी तो कभी खुद को बड़ी से बड़ी परेशानियों में घिरा पाया। लेकिन… लता ने कभी हार नहीं मानी। एक औरत की जंग क्या होती है ये लता ने सबको दिखाया।
ज़िंदगी ने समय-समय पर उसकी परीक्षा लेनी चाही, लेकिन उसने हर परिस्थिति में यह साबित कर दिया कि एक औरत अगर चाहे तो कुछ भी कर सकती है।
बचपन की बुनियाद
लता बचपन से ही बेहद मेहनती स्वभाव की थी। वो लड़की होने के बाद भी कभी किसी चीज़ के लिए निर्भर नहीं होती थी।
लता की हँसी सबसे अनोखी और आकर्षक थी — एक कमरे से दूसरे कमरे तक सुनाई देती थी। या यूँ कहें तो पूरे घर में उसकी प्यारी-सी हँसी हमेशा गूंजती रहती थी।
लता के परिवार में उसकी माँ, पापा और दो छोटी बहनें थीं। पापा एक शासकीय कर्मचारी थे, जिसके कारण घर में कभी पैसों की कमी तो नहीं थी — बस एक जिद थी, सबकुछ अपनी मेहनत से हासिल करने की।
लता बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थी। साथ ही उसे सिलाई का काम भी अच्छे से आता था।
लता को पता नहीं था कि जो आज उसका शौक है, एक दिन वही उसके जीने की सबसे बड़ी ज़रूरत बन जाएगा।
वो स्कूल के समय से ही अच्छे विद्यार्थियों में गिनी जाती रही है। जिस कारण पड़ोस के बच्चे भी उनके पास अपने स्कूल की कई समस्याओं को लेकर पढ़ने आ जाया करते थे। इस प्रकार लता ने घर से ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया।
लता की हँसी और उसका मज़ाकिया अंदाज़ बच्चों को खूब भाता था। धीरे-धीरे लता ने अपना एक बढ़िया ट्यूशन बैच शुरू कर लिया।
लता दीदी की कार
15 वर्ष की उम्र से बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने वाली लता ने बचे हुए समय में सिलाई का काम लेना भी शुरू कर दिया था।
19 की उम्र तक आते-आते उसने अपनी खुद की कार भी खरीद ली — अपने पैसों से अपनी गाड़ी।
सचमुच… लता दीदी पूरे मोहल्ले के बच्चों के लिए एक मिसाल बन गई थी।
उसकी चमचमाती सफेद रंग की गाड़ी जब गुजरती थी, तो सारे बच्चे कहते थे –
“देखो लता दीदी की गाड़ी!! अपनी मेहनत से खरीदी है दीदी ने।”
इस छोटी-सी उम्र में अपनी खुद की गाड़ी खरीदने वाली लता ने अब बड़े-बड़े सपने देखने शुरू कर दिए थे।
वो बहुत बड़ी बिजनेसवुमन बनने का सपना देखने लगी थी। वहीं दूसरी ओर उसके घर वाले उसकी शादी की तैयारी में लगे हुए थे।
शादी और धोखा
लता देखने में बेहद खूबसूरत थी। उनका रंग साफ था और वो बेहद धार्मिक स्वभाव की लड़की थी, जिस कारण उन्हें बहुत जल्द ही अच्छे-अच्छे रिश्ते आने शुरू हो गए।
घर वालों ने एक लड़के को शादी के लिए पसंद किया — उसका नाम कार्तिक था।
कार्तिक एक अच्छे बिजनेसमैन थे। उनका कपड़ों का बिजनेस था।
सब कुछ बहुत अच्छा लग रहा था, जिस कारण दोनों ने शादी जैसे पवित्र रिश्ते में बंधने का फैसला किया।
हमेशा बिजनेस करने का सपना देखने वाली लता के लिए एक बिजनेसमैन से शादी करना, उसके सपनों को नई उड़ान देने जैसा था।
लता ने सहर्ष इसे स्वीकार कर, नई शुरुआत के लिए खुद को तैयार किया।
शादी के शुरुआती सालों में पति-पत्नी के संबंध एक-दूसरे के प्रति बेहद मधुर रहे।
वो सारे रोमांटिक भरे पल, साथ घूमना, मूवी देखना, एक-दूसरे को सुंदर उपहार लाना — लगता था मानो दोनों एक-दूसरे के लिए बने हों।
लेकिन… शायद वक्त को कुछ और ही मंज़ूर था!
उनकी खुशियों को शायद किसी की नज़र लग चुकी थी।
लता ने महसूस किया कि उसके पति का व्यवहार अचानक उसके प्रति बेहद रुखा सा होने लगा था।
वो पहले की तरह अच्छे से बात नहीं करते थे। कुछ कह देने पर बहुत नाराज़ हो जाते थे।
कुछ दिनों तक तो लता ने सब कुछ बर्दाश्त किया, लेकिन उसकी सहनशक्ति की भी एक सीमा थी।
आखिरकार लता ने पूछ ही लिया —
“अचानक आप ऐसा व्यवहार क्यों करने लगे हो? कोई परेशानी है क्या?”
इस पर बेहद चिढ़ते हुए कार्तिक ने कहा –
“तुमसे मतलब? तुम अपने काम से काम रखो।”
कार्तिक का ऐसा व्यवहार लता को बिल्कुल पसंद नहीं आया।
उसने इसका विरोध किया और जानने की कोशिश की कि आखिर बात क्या है।
एक रोज़ मौका पाकर लता ने कार्तिक का फोन चेक किया, जब वो नहाने गए थे।
जब लता ने कार्तिक का फोन देखा, तो उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
कार्तिक के मोबाइल में किसी जूही नाम की लड़की का मैसेज था।
लता ने पूरी चैटिंग पढ़ी और वहीं सिसक कर रोने लगी।
जूही और कार्तिक का अफेयर चल रहा था, और वो भी कई महीनों से।
यह सब देखकर लता बहुत रोई। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे।
लेकिन हाँ, उसे इतना ज़रूर समझ आ गया था कि कार्तिक उसे महीनों से धोखा दे रहा था।
उसके बदले हुए व्यवहार की वजह अब सामने थी।
उसने महसूस किया कि पल में सारे सपने, सारे ख्वाब — सब कुछ खत्म हो गया।
लता को रोना और ग़ुस्सा दोनों एक साथ आ रहा था।
रोने के बाद वो ग़ुस्से से आगबबूला हो अपने पति के पास गई।
लता जोर से चीखी –
“कार्तिक, ये सब क्या है? तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हो? तुम मुझे ऐसे धोखा नहीं दे सकते! किसी और लड़की से रिश्ता?”
पहले तो कार्तिक झिझका, लेकिन फिर रौब में आकर बोला –
“हाँ है मेरा उस लड़की से रिलेशन! करता हूँ मैं उसे पसंद और उससे शादी भी करूँगा। क्या कर लोगी तुम मेरा?”
इतना कहकर वो वहाँ से चला गया।
लता सदमे, ग़ुस्से और अनजाने डर से भर गई थी।
उसे लगा कि शायद वो उसे मनाएगी, समझाएगी तो मान जाएगा,
लेकिन लता की हर कोशिश नाकाम रही।
उसके पति ने उसके साथ एक और बड़ा धोखा किया —
उसने लता की मेहनत से खरीदी हुई कार बेच दी।
यहाँ तक कि जमीन और घर भी बेचकर उसे घर से निकाल दिया और खुद कहीं और रहने चला गया।
एक औरत की जंग कहानी के बाद इन्हें भी पढ़े –
1- नसीबनामा – एक मुकम्मल मोहब्बत की कहानी
2- अजय की आख़िरी मोहब्बत – दर्द, धोखा और एक राज़
बिखरने के बाद खुद को समेटना
अपने ही घर और अपने ही पति के जीवन से निकाली जा चुकी लता अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थी।
वो खुद को समझा नहीं पा रही थी कि सब कुछ खत्म हो गया।
सड़क किनारे अकेली बैठकर वो घंटों रोती रही।
समय को, खुद को, अपने पति को कोसती रही।
मानो वो पागल-सी होने लगी थी।
अब भला पति के छोड़ जाने के बाद जाए भी कहाँ? किससे सहारा मांगे?
समाज तो उसे ही दोष देगा।
कहेंगे – “ज़रूर लड़की में ही कोई कमी होगी, तभी उसका पति उसे छोड़ गया।”
ऐसे ही बुरे ख्यालों में डूबी लता सोच रही थी कि माँ-बाप के घर जाए या किसी दोस्त के पास।
फिर ख्याल आया कि जब अपनों ने छोड़ दिया, तो पराए क्या साथ देंगे?
एक बार को लता ने सब कुछ खत्म मान लिया था — यहाँ तक कि खुद को भी।
लेकिन फिर उसने हिम्मत जुटाई।
बचपन की वही जिद्दी लता को याद किया, जिसने कभी हार नहीं मानी थी।
उसने खुद को समेटा और एक नई शुरुआत के लिए तैयार किया।
एक नई शुरुआत बिना किसी सहारे के
अब लता समझ चुकी थी — उसका जीवन यहाँ खत्म नहीं होता।
मन से वो तैयार थी। अब बस मंज़िल की तैयारी करनी थी।
उसने अपने पापा को फोन किया और सारी बातें बताईं।
पापा ने घर आने को कहा, लेकिन लता ने साफ मना कर दिया।
अब वो खुद के दम पर आगे बढ़ना चाहती थी।
उसने ब्याज पर कुछ पैसे उधार लिए और एक कमरा किराए पर लिया।
साथ ही सिलाई का काम शुरू किया।
शुरुआत में दिक्कतें आईं, लेकिन धीरे-धीरे उसे काम मिलना शुरू हुआ।
वाकई, उसके हाथ में जादू था।
जो भी ग्राहक एक बार आता, दोबारा ज़रूर आता।
फिर एक बार लता मोहल्ले की “लता दीदी” बन गई।
बाद में उसने कपड़े सिलने के साथ-साथ बेचने का काम भी शुरू कर दिया —
खास गुजराती कपड़े।
साथ ही RTO का काम भी उसने सीख लिया।
इस तरह फिर एक बार उसने खुद को एक अच्छे मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया।
लेकिन अंदर की चिंगारी अभी भी शांत नहीं हुई थी।
फिर एक बार लता दीदी की कार
दिन-रात की मेहनत से लता ने फिर एक बार अपनी खुद की कार खरीदी।
मोहल्ले में फिर से लता दीदी की कार हवा से बातें करती हुई नज़र आने लगी।
इतना ही नहीं, उसने खुद का घर भी खरीद लिया और नई जगह पर ज़मीन लेकर एक दुकान भी खोली।
सच में — लता ने जिस काम को छुआ, वो सोना बन गया।
अकेली होने के कारण उसने बाद में अपनी बहन की बेटी को गोद ले लिया,
और उसकी पढ़ाई का पूरा खर्चा उठाने लगी।
सीख — औरत कभी नहीं हारती
लता, एक घरेलू और धार्मिक महिला होने के साथ-साथ ज़िंदगी को भी अच्छे से समझ चुकी थी।
उसने कभी हार नहीं मानी — चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी रही हों।
वो हमेशा आत्मविश्वास से भरी रही।
आज वो समाज के लिए एक प्रेरणा का स्त्रोत हैं।
उन्हें देखकर घरेलू हिंसा से जूझ रहीं कई महिलाओं को आगे बढ़ने की हिम्मत मिलती है।
वो समाज के प्रति बेहद जिम्मेदार हैं और मोहल्ले के बच्चों को आज भी पढ़ा लिया करती हैं।
बच्चों की पसंद तो वो हमेशा से ही रहीं हैं।
उम्मीद करता हूँ आपको ये सच्ची घटना पर आधारित कहानी ज़रूर पसंद आई होगी।
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