Monday, June 1, 2026
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जिंदगी या समझौता – एक लड़की जिसने परिवार और प्यार के बीच झेला संघर्ष

ये कहानी हैं एक ऐसी लड़की की जिसकी ख्वाहिशें बड़ी तो नहीं थी पर उसके हालात को देखते हुए इतनी छोटी भी नहीं थी।

एक 19 साल की लड़की, संध्या, जिसने जवानी की भूल-भुलैया में की गलतियाँ की । संध्या के घर में चार लोग थे एक भाई, माँ, बाप और वो खुद, उनका परिवार सम्पन्न तो था परन्तु सुखी कहना उचित नहीं होगा।

संध्या का बचपन और परिवार का दबाओ

संध्या की माँ मानसिक रूप से ठीक नहीं थी, पिता की सोच पुरानी थी, साथ ही उनको अपनी इज्जत से ज्यादा घर का मान सम्मान उनके लिए सबसे ऊपर था। शायद उनके परिवार के सदस्यों से भी ऊपर। छोटा भाई अपने आप में ही मग्न रहता और बची हमारी संध्या जो की शांत सरल मधुर स्वाभाव के साथ खुले विचारों वाली मज़ाकिया मिजाज की थी ।

उसे शुरू से ही चार दीवारी के अंदर रखा जाता था, इसलिए नहीं की उसने कोई गलती की है, बल्कि इसलिए की उससे कभी कोई गलती ना हो जिससे घर की इज्जत मिट्टी में मिल जाये । पर कहते हैं ना बचपन से जवानी तक के सफऱ में कई गलतियां होतीं हैं, वैसे ही संध्या ने भी की..

जिंदगी या समझौता” अपनी बढ़ती उम्र के साथ जवानी के असर में उसने कई सपने देखे, कई हादसे भी उसके साथ हुए फिर भी वो अपने सपनो को भुला ना सकी उसके सपने कुछ ऐसे थे –

1. परिवार

2. प्यार=मन्नत

3. अनसुने सपने..

संध्या के पापा काफ़ी बेरुखी मिजाज के थे । संध्या के जन्म के बाद से ही उन्हें इस बात का डर था की कही लड़की जात समाज में नाक ना कटा दे, इसलिए वो संध्या को खुद स्कूल छोड़ने लेने जाते थे । लड़को से शुरू से दूर रहने की हिदायत देते पर संध्या घर से बाहर निकलते ही इन सबको नज़रअंदाज कर देती । उसके कई लडके दोस्त थे, जिनके बारे में उसके घर में किसी को पता नहीं था । एक बार एक लडके से संध्या बात ही कर रही थी की उसके पापा आ गये उन्होंने उसे वहाँ कुछ नहीं कहा पर घर आते ही धमकी दे दी दोबारा ऐसा हुआ तो स्कूल बंद ।

फिर सब सही ही चल रहा था की एक लडके ने संध्या को प्रोपोज किया, संध्या कुछ समझ ना पायी उसने हाँ कह दिया पर संध्या के पास फोन नहीं था तो उससे रोज बात नहीं हो पाती थी । जिसके चलते उस लडके ने उसकी दोस्त में रूचि दिखानी चालू कर दी वो लड़का संध्या से मिलना चाहता था, उसके साथ घूमना चाहता था, पर संध्या के पापा उसे कभी घर से अकेले बाहर नहीं छोड़ते थे आखिर में उस लडके ने संध्या से अलग होने का फैसला ले लिया, जो की संध्या के लिए बढ़ती जवानी का पहला हादसा था !

इसका असर यह हुआ की संध्या के मन में अब घरवालों के लिए गुस्से की भावना आने लगी, अब वो खुद की जिंदगी को बस पाबंदी मानने लगी । जब उसकी सहेलियां घूमने फिरने जाती, मस्तियाँ करती तो संध्या को जलन होने लगती, पर वो किसी से कह नही पाती वो बस अब घर से आजाद होना चाहती थी, खुद के हिसाब से घूमना फिरना चाहती थी, घर वालों से पिछा छुड़ाना चाहती थी ।

संध्या पढ़ाई में काफ़ी अच्छी थीं तभी उसने एक एग्जाम पास करके हॉस्टल जाके फ्री में पढ़ाने का मौका पा लिया, उसे लगा अब वो घर से आजाद हो जाएगी तब वो 16 साल की हो चुकी थी, लेकिन उसकी खुशी ज्यादा देर तक नहीं रह पायी क्योंकि उसके पापा ने ये कह कर बाहर जाने से मना कर दिया की बाहर गयी और बिगड गयी तो ! फिर संध्या को यह समझ आया की उसकी पढ़ाई लिखाई का भी कोई फायदा नहीं अब संध्या ने पढ़ाई से अपना पूरा मान हटा दिया।

अब वो पढ़ाई से ज्यादा फालतू चीजों में अपना समय लगाने लगी, अपनी सहेली के बॉयफ्रेंड से बात करना स्कूल जल्दी पहुंच के घूमने जाना, घर वालों से बाते छिपाना, फिर इसका असर जब यह हुआ की उसके नंबर परीक्षा में कम आये इस पर उसके पापा ने उसे खूब डाटा। तब संध्या ने अपना स्कूल बदल दिया, उसे लगा की उसके प्राइवेट स्कूल में पड़ने से पापा का पैसा बर्बाद हो रहा है इसलिए वो  सुना रहे हो ! संध्या के दिल में उसके घर वालो के लिए नफरत ने जन्म ले लिया था, अब संध्या एक सरकारी गर्ल्स स्कूल में चली गयी।

जवानी का पहला झटका – राजेश से मुलाकात (जिंदगी या समझौता)

जहां पर उसकी मुलकात रोशनी, प्रतिमा, आँचल से हुई । इन सबकी उम्र 17-19 के बिच थी। सबमे जवानी की सीमा का जोश चरम पर था!! रोशनी सबसे आगे थी इन सबमे उसके कई बॉयफ्रेंड थे और उसकी उम्र से बड़े भी थे । रोशनी स्कूल के बहाने जब अपने बॉयफ्रेंड से मिल के आती तो सारी बाते अपनी ग्रुप में बताती की उसने क्या क्या किया ।

आँचल अपने घर वालो को नींद की गोली दे देती खाने में मिला के फिर वो अपने बॉयफ्रेंड से मिलने जाती । प्रतिमा को घर में पाबन्दी नहीं थी इसलिए वो कोई भी बहाना करके निकल जाती बची हमारी संध्या उसका तो न ही कोई बॉयफ्रेंड था और न ही उसे आजादी थी । तभी उसकी सहेली ने उसके दोस्ती एक दूर के रहने वाले शख्स राजेश से कराई राजेश एक बिगड़ा लड़का था जिसका अंदाजा ना तो उसकी सहेलियों को था, ना ही संध्या को।

उसने संध्या को फोन दिया उससे संध्या को यह लगने लगा की राजेश उसे समझता है, उससे प्यार करता है, वो उसे खोना नहीं चाहती थी । राजेश संध्या से मिलने की जिद करता है, संध्या उसे अपने घर के हालातों और अपने पापा के सोच के बारे में बताती है और साथ ही अपने हर एक डर का जिक्र उसके सामने कर देती है । अब राजेश को संध्या की सारी कमजोरी पता थी !

एक दिन की बात है, राजेश संध्या से कहता है की वो उससे बहोत प्यार करता है। उसे उसके घर से बाहर ले के जायेगा, उससे शादी करेगा, उसको सारी खुशी वो हर आजादी देगा जो संध्या को कभी ना मिली । उसे समझेगा, ये सब सुन के संध्या रोने लगती है की उसके माँ बाप उस पर यकिन ना कर पाए राजेस ने किया ।

तभी राजेश उससे मिलने की जिद करता है, संध्या फिर से अपनी दिक्क़तो के बारे में बताती है तभी राजेश उससे कहता है… ना मिल लेकिन मैं तुम्हें विडिओ कॉल में देखना चाहता हूँ। मेरे लिए इतना तो कर ही सकती हो। संध्या सबके सोने के बाद बंद कमरे में विडिओ कॉल करती है ।

थोड़ी देर बात होने के बाद राजेश उससे बिना कपड़ों के देखने की जिद करता है, लेकिन संध्या मना कर देती है। तब राजेश उसे अपने प्यार पर यकीन रखने को कहता है और खुद के सारे कपड़े उतार कर विडिओ कॉल में बैठ जाता है, अब संध्या न चाहते हुए भी उसे खोने के डर से अपने कपड़े उतरने लगती है और दोनों एक दूसरे के सामने बिना कपड़ो के विडिओ कॉल पर बैठे रहते हैं । राजेश, संध्या को देखकर खुद को रोक नहीं पता ओर हस्तमैथुन करने लगता है…

इसकी अगली सुबह संध्या सारी बातें शरमाते हुए अपने ग्रुप में बता देती है, सब इस बात के मजे लेते है…

अब राजेश का खुद पर काबू नही होता, अब वो किसी भी हाल में संध्या से मिलके अपनी सम्भोग की जरूरत को पूरी करना चाहता था । अब राजेश रोज-रोज संध्या से बिना कपड़ो की फोटो वीडियो कॉल के लिए बोलता शुरुआत में संध्या ने इन चिजो के लिए मना नहीं किया..

पर रोज-रोज की इन बातों से संध्या तंग आ गयी थी, तब एक दिन उसने इन सब के लिए मना कर दिया । तब राजेश ने संध्या से मिलने की जिद शुरू कर दी, अब उसे संध्या किसी भी हाल में बिस्तर पर चाहिए थीं…

ब्लैकमेल और पापा की प्रतिक्रिया

संध्या ने साफ मना करते हुए अपने पापा का डर उसको बताया, तब राजेश ने उसे ब्लेक मेल करना शुरू कर दिया। उसने विडिओ कॉल के स्क्रीन शॉट ले रखे थे। अब वो उन्हें संध्या के पापा के पास भेजने की धमकी देने लगा क्योंकि उसे संध्या की सारी कमजोरी पता थी । संध्या काफ़ी रोई समझाई की मेरे पापा मुझे नहीं समझते, अगर ये सब हो गया तो मुझे जान से मर देंगे । मगर लड़का ना माना आखिर में संध्या ने 2 दिन का समय मांगा ।

अगले दिन ये सारी बाते जब उसने अपने ग्रुप में बताई तो सारी लड़कियो के होश उड़ गये । सब डर गई । सबने कहा की राजेश को ब्लॉक कर दे ,उससे कॉन्टेक्ट ना कर । संध्या ने ठीक ऐसा ही किया पर ये उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी। लडके ने तीसरे दिन सारी फोटो उसके पापा के फोन पर भेज दी थी, पर उनमे संध्या की कोई फोटो नहीं थी दूसरी लड़कियो की बिना कपड़ो की फोटो थीं..उसने कभी संध्या की बिना कपड़ों वाली फोटो स्क्र्रीनशॉट की ही नहीं थी । की थीं तो केवल तब ज़ब उसने पुरे कपडे पहन रखे थे… पर संध्या के पापा को क्या पता की बिना कपड़ों वाली फोटो संध्या की नही थी । 

संध्या अपने पापा को कुछ भी नही समझा पायी, ना उनसे ये कह पायी की इन सब में उसकी गलती उतनी नहीं थी । जितना वो समझ रहे है उन्होंने संध्या के लिए इतनी गंदी गंदी गलियों का उपयोग किया जो एक बाप अपनी बेटी से कहने की सोच भी नहीं सकता !! उनहोने संध्या को गलत मान लिया था, संध्या इतनी शर्मिंदगी महसूस कर रही थीं की वो अपनी जान देने के लिए फ़िनाइल पीने बाथरूम तक चली गयी थी । तभी उसके पापा ने उसे ये कहते हुए वापस ले आये की अगर मर जयेगी तो उनकी इज्जत पुरे गाँव में चली जाएगी क्योंकि ये सारी बाते संध्या उसके सहेलियों और उसके घरवालों के अलवा किसी को पता नहीं था ।

एक बाप को अपनी बेटी की नहीं उसकी इज्जत की पड़ी थीं…. संध्या के लिए ये उसकी जिंदगी का पहला झटका था . जहाँ उसने फिर एक बार महसूस किया की ये “जिंदगी है या समझौता” । कहानी यही खत्म नहीं होती …

2 दिन खाना ना खाने के वाद जब संध्या खाना खाने बैठी थीं तब उसके आँखो से निकलते हुए आँशु उसकी थाली में गिर रहे थे और फिर भी वो ये समझते हुए खुद को दिलासा दे रही थीं एक दिन सब ठीक होगा । वो अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जी के रहेगी ।

साथ ही ये सोच रही थी अगर मेरे माँ पापा का रवैया मेरे लिए दोस्ताना होता, वो मुझे समझते तो ये नौबत ही नहीं आती । अगर मुझे भी चार दीवारी में नहीं रखा जाता सबसे बात करने की छूट होती, मेरे मोह्हले में दोस्त होते तो मुझे किसी लडके की या उसके प्यार की जरुरत नहीं होती । मुझे मेरे माँ बाप से हिम्मत मिला होता तो मैं यहां नहीं होतीं । वो मुझ पर यकिन रखे होते तो मैं यूं न भटकती किसी के सहारे के लिए….

यहां गलती किसकी थी पता नहीं, पर बच्चे पाबन्दी में ज्यादा बिगड़ते है! माँ बाप से कटने लगते है माँ बाप को बच्चों को समझना चाहिए। ऐसे की जब उनको किसी की जरुरत हो चाहे साथ की या किसी बात की तो अपने माँ बाप से बेझिझक कह सके । “अगर माँ बाप बच्चों को समझेंगे तभी बच्चे माँ-बाप को समझेंगे!”

ऐसे ही माँ बाप की चाहत हर बच्चे को होतीं है जो संध्या को आज भी हैँ……. जो की उसका पहला सपना है ।

“जिंदगी या समझौता” कहानी के और भी भाग आगे इस वेबसाईट पर पोस्ट की जाएंगी । पाठक यदि हमसे संपर्क करना चाहें तो हमसे इस प्रकार से संपर्क कर सकते हैं –

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HII.. I AM AANYA. जहां देखो, वहां एक कहानी छुपी है – चाहे वो रोज़मर्रा की छोटी-छोटी बातें हों या फिर कल्पना के उड़ते पंख। मैं शब्दों के जाल बुनती हूं, हर भावना को कागज पर उतारती हूं, और हर अनकही कहानी को आवाज़ देती हूं।
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